Class 9 Biology Chapter 1 Notes in Hindi | जीवन की मौलिक इकाई ( THE FUNDAMENTAL UNIT OF LIFE) Best Science Notes For Class 9 in Hindi

“जीवन की मौलिक इकाई ( THE FUNDAMENTAL UNIT OF LIFE)” Class 9 Biology Chapter 1 Notes in Hindi

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Class 9 Biology Chapter 1 Notes in Hindi
Cell – THE FUNDAMENTAL UNIT OF LIFE

कोशिका (Cell )

            :- जीव शरीर की रचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को कोशिका कहते हैं (The structural and functional unit of living body is called as a Cell .) यह शरीर की रचनात्मक इकाई है क्योंकि कोशिकाओं के मिलने से शरीर की रचना होती है | यह शरीर की कार्यात्मक इकाई भी है क्योंकि पूरे शरीर के कार्य कोशिकाओं के ही कार्यों के प्रतिफल होते हैं | 

      कोशिकीय रचना के आधार पर उन्हें दो बड़े समूहों में बाँटा गया है –

      (1) एक कोशिक जीव (Unicellular Organisms) जैसे – अमीबा (Amoeba), पैरामीशियम (Parameseium), यूग्लीना ( Euglena ), क्लेमाइडोमोनस ( Chlamydomonas ), जीवाणु ( Bacteria) इत्यादि | इन जीवधारियों को एक कोशिक जीव कहते हैं | इसके शरीर की एकमात्र कोशिका स्वयं से एक पूरी जीव होती है तथा सभी जैविक क्रियाएं जैसे – पोषण,श्वसन , उत्सर्जन , जनन आदि उसी एक कोशिका द्वारा सम्पादित की जाती है | 

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        (2) बहु कोशिक जीव ( Multicellular Organismy ) जैसे – कवक ( Fungi ), पादप ( Plants), तथा विकसित जन्तु | ये बहु कोशिक जीव एक कोशिक जीव से ही विकसित हुए हैं | ऐसे जीवों में कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनती हैं , ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं और अंग मिलकर अंगतंत्र Organ System ) बनातें हैं | ऐसे जीवधारियों में अलग – अलग कार्य , अलग – अलग अंग द्वारा अथवा उनके आपसी समन्वय द्वारा सम्पादित किये जाते हैं | इसे शरीर क्रियात्मक श्रम – विभाजन ( Phisiological Division of Labour) कहते हैं | यही कारण है कि बहु कोशिक जीव एक कोशिक जीवों से अधिक विकसित होते हैं|

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कोशिका की खोज ( Discovery of Cell )

            कोशिका की खोज सन 1665 ई. में अंग्रेजी वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक ने किया था। इसके बाद कोशिका के अंदर केन्द्रक जैसे गोलाकार रचना की खोज रॉबर्ट ब्राउन ने 1853 ई. में किया। पुन: उसके बाद दुजरदीन नामक वैज्ञानिक कोशिका के अंदर जीवित पदार्थ का पता लगाया , जिसे पुरकिंजे ने जीव द्रव्य नाम रखा , इसे कोशिका द्रव्य भी कहते हैं। 

कोशिका सिद्धांत 

           प्रसिद्ध जर्मन वैज्ञानिक एम०जे० शलाइडेन एंव टी० शवान ने सम्मिलित रूप में कोशिका से संबंद्धित एक नियम का प्रतिपादन किया , जिसे कोशिका सिद्धांत कहते हैं। इस सिद्धांत की प्रमुख बाते इस प्रकार है –

           सभी जीवो की रचनात्मक इकाई कोशिका होती है। 

           उपपच्चय संबंद्धी सभी क्रियाएं कोशिका में ही संपन्न होती है। 

           सन 1855 ई. में आर० वार० चाऊ ने स्पष्ट किया कि नई कोशिकाओं की उत्पति पूर्व में उपस्थित कोशिकाओं से ही होती है। सन 1864 ई० में स्ट्रास बर्गर  कोशिका में उपस्थित केन्द्रक को पैत्रिक लक्षणों का वाहक बताया। 

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कोशिका के प्रकार 

        कोशिका मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं :-

(1) प्रोकैरियोटि कोशिका 

        जो कोशिका केन्द्रक विहीन एंव अपूर्ण विकसित होता है ,प्रोकैरियोटि कोशिका  कहलाता है। जैसे -सूक्ष्मजीवों में उपस्थित कोशिकाएं। यह आकर में अत्यंत छोटा होता है ,इसमें केन्द्रक झिल्ली से नहीं घिरी हुई  रहती है, इसमें केवल एक ही गुणसूत्र पाया जाता है , इसमें कोशिका के अनेक भाग नहीं पाए जाते हैं , इसमें कोशिका विभाजन की क्रिया मुकुलन , विखंडन इत्यादि के द्वारा होता है। 

(2) यूकैरियोटि कोशिका 

         जिस कोशिका में केन्द्रक उपस्थित रहता है एंव कोशिकाएं पूर्ण विकसित और संगठित होता है , यूकैरियोटि कोशिका कहलाता है।  जैसे – मनुष्य, पेड़ – पौधे एंव जीवों में उपस्थित कोशिकाएं। यह आकर में अपेक्षाकृत बड़ा होता है , इसमें केन्द्रक, झिल्ली से घिरी रहती है। इसमें गुणसूत्र की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होता है , इसमें प्राय: सभी कोशिकाएं पायी जाती है , इसमें कोशिका विभाजन समसूत्रण या अर्धसूत्रण के द्वारा होता है। 

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कोशिका की रचना एंव उसके कार्य 

       कोशिका की रचना अनेक सूक्षम अंगों से होता है , जिसे कोशिकांग कहते हैं।  इनका नाम एंव कार्य इस प्रकार है ;

(1) कोशिका झिल्ली (Plasma membrane)

         कोशिका के चारो ओर प्रोटीन के अणु से बना एक जीवित झिल्ली कोशिका झिल्ली कहलाता है। यह एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली है जिससे कुछ विशेष पदार्थ कोशिका के अंदर और बाहर आ – जा सकते हैं। 

          इसका मुख्य कार्य कुछ विशिष्ठ पदार्थ जैसे – कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , ऑक्सीजन , प्रोटीन आदि को अंदर जाने देना तथा कार्बन डाई – ऑक्साइड को कोशिका से बाहर जाने में सहायता करना है। 

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(2) कोशिका भित्ति ( Cell wall )

         पादप कोशिका में सेल्यूलोज का बना दृढ़ , निर्जीव एंव पारगम्य आवरण को कोशिका भित्ति कहते हैं। यह कोशिका को एक निश्चित आकर प्रदान करता है, तथा अतिरिक्त सुरक्षा भी प्रदान करता है। 

(3) कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)

         कोशिका झिल्ली के अंदर एक गाढ़ा , पारभासी एंव अर्ध्यतरल माध्यम को  कोशिका द्रव्य कहते हैं।  इस द्रव्य में ही कोशिका के अन्य भाग स्थित रहते हैं।  जैसे –

A. केन्द्रक ( Nucleus ) 

        कोशिका का वह महत्वपूर्ण केंद्रीय भाग जो दोहरी झिल्ली से घिरा रहता है तथा जो कोशिका के सम्पूर्ण क्रिया को नियंत्रित करता है , केन्द्रक कहलाता है। 

       केन्द्रक के अंदर एक विशेष प्रकार के द्रव भरा रहता है जिसे केन्द्रक द्रव्य ( Nucleoplasm ) कहते हैं।  इसमें मुख्यत: दो प्रकार की रचनाएं होती है-

(a) क्रोमैटिन जाल (Chromatin network) 

        यह एक तंतुवत रचना है जो DNA एंव हिस्टोन नामक प्रोटीन का बना होता है।  कोशिका विभाजन के समय यह रिबन जैसे रचना में बदल जाता है , जिसे गुणसूत्र ( Chromosomes ) कहते हैं।  इस गुणसूत्र पर असंख्य सूक्षम कण पाए जाते हैं , जिन्हें जीन कहते हैं।  जीन हीं कोशिका को वह अंग है जो पैत्रिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में स्थानांतरित करता है।  

(b) केन्द्रिका ( Nucleolus ) 

        केन्द्रक द्रव में उपस्थित एक महत्वपूर्ण रचना जो प्रोटीन तथा राइबोज़ न्यूक्लिक अम्ल (RNA) का संश्लेषण करता है , केन्द्रिका कहलाता है। 

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B. अंत: परद्रव्यी जालिका ( Indo plasmic reticulum )

        कोशिका द्रव्य में उपस्थित नलिकाओं का वह संजाल जिसका एक सिरा कोशिका झिल्ली तथा दूसरा सिरा केन्द्रक झिल्ली से जुड़ा रहता है , अंत: परद्रव्यी जालिका कहलाता है।  इस नलिका पर राइबोसोम नामक अंगक पाया जाता है , जो प्रोटीन के संश्लेषण में भाग लेता है। 

C. रिक्तिका ( Vacuoles )

       यह मुख्य रूप से पादप कोशिका में पाया जाता है जो उसके कुल आयतन के लगभग 50 – 90 प्रतिशत के बीच होता है।  यह प्राय: खनिज , शर्करा , प्रोटीन , एमिनो अम्ल तथा उत्सर्जी पदार्थ से भरे रहते हैं , एक कोशिकीय जंतुओं के अंदर पाई जानेवाली रसधानिया , जल संतुलन , उत्सर्जन , भोजन के अंतर्ग्रहण में सहायता करता है।

D.माइटोकॉन्ड्रिया ( Mitochondria )
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माइटोकॉन्ड्रिया ( Mitochondria )

        कोशिका द्रव्य में उपस्थ्गित बेलनाकार , गोलाकार एंव तन्तुवत रचनाओं को माइटोकॉन्ड्रिया कहते हैं। यह दोहरी झिल्ली से घिरा रहता है।  माइटोकॉन्ड्रिया में DNA के अणु , राइबोसोम के कण एंव अनेक एंजाइम पाए जाते हैं।  जो श्वसन के लिए उपयुक्त होता है। 

          कोशिका के इस अंगक को श्वसन की सक्रिय स्थल , कोशिका का ऊर्जा गृह या पावर हाउस कहते हैं। 

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E. लवक (Plastid) 

        पादप कोशिका में पाया जाने वाला कोशिकांग जो दोहरी झिल्ली से घिरा रहता है , लवक कहलाता है। 

        यह मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं ;

(a) वर्णीलवक (Chromoplast)

       यह लवक पौधों के पुष्पों एंव फलो में पाया जाता है। इस कारण ही फूल विभिन्न रंगो के होते हैं। 

(b) अवर्णीलवक (Leucoplast)

        यह लवक मुख्य रूप से पौधों के जड़ों में पाया जाता है तथा इस लवक का मुख्य कार्य पौधों का संचय करना है। 

(c) हरित लवक (Chloroplast)

       यह लवक मुख्य रूप से पौधों के पतियों एंव तनों में पाया जाता है।  सामान्यत:  पादप कोशिका में हरित लवक की संख्या 01 – 80 तक होते हैं। इसमें पर्णहरित नाम के वर्णक उपस्थित रहता है जो पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को पूरा करने में सहायक होता है।  इसलिए इस कोशिकांग को पादप कोशिका का रसोई घर कहते हैं।  हरित लवक में ही यह क्षमता होती है कि सौर ऊर्जा  का रूपांतरण रासायनिक ऊर्जा में कर सकें। 

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F. गॉल्जिकाय उपकरण 

      कोशिका द्रव्य में झिल्लियों से घिरे नलिकाओं , चपटी कुण्डलिकाओ एंव थैलियों के समूह को गॉल्जिकाय उपकरण कहते हैं।  यह कोशिकांग केवल जंतु कोशिकाओं पाए जाते हैं।  इसके सामान पादप कोशिका में पायी जाने वाली रचना डिक्टियोसोम कहलाता है।  इसका मुख्य कार्य कोशिका झिल्ली की मरम्मत , लाइसोसोम की रचना तथा कोशिका भीति की रचना में सहायता करना है। 

G. लाइसोसोम (Lysosome)

      यह एकहरी झिल्ली से घिरा हुआ गोलाकार  थैलीनुमा रचना है जो पाचक रस या एंजाइम से भरा रहता है। यह कोशिका में पहुँचानेवाले बड़े अणुओं को पचाने में सहायता करता है। साथ ही , हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में भी सहायता करता है। यदि किसी कारण वश यह थैली फट जाती है तो कोशिका में उपस्थित सभी कोशिकांग को मृत कर देता है , इसलिए इसे कोशिका के आत्महत्या के थैली या विध्वंशकारी दस्ता या पाचक थैली कहते हैं। 

H. सूक्ष्मनलिकाएं तथा सूक्ष्मतंतु 

      यह कोशिका द्रव्य में उपस्थित एक तन्तुवत रचना है , जो प्रोटीन का बना होता है। इसका  मुख्य कार्य कोशिका में पदार्थो में गति उत्पन्न करना है। 

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I. तारक केंद्र (Centro some)

       यह सूक्ष्म गोलाकार रचना कोशिका के केन्द्रक के पास उपस्थित रहता है जो कोशिका विभाजन के समय विपरीत ध्रुवो पर चला जाता है। 

J. कशाभिका और पक्षमाभिका (Magellan and Cilia)

     कुछ जंतु कोशिकाओं के कोशिका झिल्ली के बाहर पतली बालनुमा रचनाएँ निकली रहती है। इसी के बाहरी भाग को पक्षमाभिका तथा भीतरी भाग को कशाभिका कहते हैं। यह एककोशिकीय जलीय जन्तुओ में गति के दौरान पतवार का काम करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस पोस्ट में हमने आपको Class 9 Biology Chapter 1 Notes in Hindi का लगभग सभी पॉइंट्स को बता दिया है | हमें आशा है कि आपको हमारी यह नोट्स पसंद आयी होगी | अगर आपको हमारी पोस्ट पसंद आती है तो आप कमेंट बॉक्स में एक बार जरूर कमेंट करे और अपने दोस्तों में भी शेयर करे | 

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नमस्ते, मैं नीरज कुमार (माही) हूँ और मैं स्नातक का महाविद्यालय का छात्र हूँ। लेकिन मैं एक फुल टाइम ब्लॉगर हूं और 2020 से ब्लॉगिंग कर रहा हूं। यह ब्लॉग वेबसाइट (माही स्टडी) मेरे द्वारा स्थापित है।

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